2nd PUC Hindi Question and Answer Gehne
Looking for 2nd PUC Hindi textbook answers? You can download Chapter 14: Gehne Questions and Answers PDF, Notes, and Summary here. 2nd PUC Hindi solutions follow the Karnataka State Board Syllabus, making it easier for students to revise and score higher in exams.
Karnataka 2nd PUC Hindi Textbook Answers—Reflections Chapter 14
GehneQuestions and Answers, Notes, and Summary
2nd PUC Hindi Chapter 14
Gehne
Scroll Down to Download Gehne PDF
I. एक शब्द या वाक्यांश या वाक्य में उत्तर लिखिए :
Question 1.
बेटी सोने के गहने क्यों नहीं चाहती ?
Answer:
क्योंकि वे तकलीफ देते हैं।
Question 2.
बेटी रंगीन कपड़े पहनने से क्यों इनकार करती है ?
Answer:
क्योंकि रंगीन कपड़े मिट्टी में खेलने नहीं देते।
Question 3.
माँ रंगीन कपड़े और गहने पहनने के लिए क्यों आग्रह करती है ?
Answer:
ताकि बेटी सुंदर दिखे।
Question 4.
बेटी को क्यों सुंदर दिखना है ?
Answer:
देखने वालों को आनंद देने के लिए।
Question 5.
बेटी सजने-धजने से क्या महसूस करती है ?
Answer:
बड़ा बंधन।
Question 6.
बेटी किन्हें गहने मानती है ?
Answer:
अपना बचपन और माँ का मातृत्व।
Question 7.
माँ और बेटी एक दूसरे के लिए क्या बनते हैं ?
Answer:
एक-दूसरे के गहने।
II. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
Question 1.
बेटी रंगीन कपड़े और गहने क्यों नहीं चाहती?
Answer:
बेटी रंगीन कपड़े और सोने-चाँदी के गहने इसलिए नहीं चाहती क्योंकि उन्हें पहनने से उसे तकलीफ और बंधन का अनुभव होता है। सज-धजकर सुंदर दिखना उसे पसंद नहीं क्योंकि ऐसे कपड़े पहनकर वह स्वतंत्र रूप से खेल नहीं सकती, विशेष रूप से मिट्टी में। वह प्राकृतिक रूप से, जैसे वह है, वही सुंदर मानती है। इसलिए वह कृत्रिम सौंदर्य और दिखावे के गहने व कपड़े पहनने से इनकार करती है।
Question 2.
‘गहने’ कविता के द्वारा कवि ने क्या आशय व्यक्त किया है?
Answer:
‘गहने’ कविता के माध्यम से कवि यह संदेश देना चाहते हैं कि सच्ची सुंदरता बाहरी वस्तुओं में नहीं, बल्कि प्रेम, स्नेह, मातृत्व और सरलता में होती है। सोने-चाँदी के गहने केवल बाहरी दिखावे के साधन हैं, जो न केवल महँगे होते हैं, बल्कि बंधनों का भी प्रतीक बन जाते हैं। कवि बताना चाहते हैं कि बच्चे की निष्पापता और माँ का मातृत्व ही जीवन के वास्तविक गहने हैं। माँ और बेटी एक-दूसरे के लिए सबसे मूल्यवान गहना हैं, इसलिए उन्हें अन्य गहनों की आवश्यकता नहीं।
III. ससंदर्भ भाव स्पष्ट कीजिए :
“ताकि दिखाई दो सुंदर, बहुत ही सुंदर—
यों कहती हो सुंदर लगे किसको, कहो माँ?
देखनेवालों को लगता है सुंदर, देता है आनंद;
मगर मुझे बनता है बड़ा बंधन!”
Answer:
प्रसंग :
प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘साहित्य गौरव’ की कविता ‘गहने’ से लिया गया है, जिसके रचयिता महान कन्नड़ कवि कुवेम्पु हैं। इस कविता में माँ और बेटी के मधुर संवाद के माध्यम से कवि ने सादगी और प्राकृतिक सौंदर्य का महत्व बताया है।
संदर्भ :
इन पंक्तियों में बेटी अपनी माँ से कहती है कि उसे सुंदर दिखने के लिए गहने और रंग-बिरंगे कपड़े पहनने का आग्रह किया जाता है, परंतु वह इस कृत्रिम सजावट को आवश्यक नहीं मानती। कवि यहाँ बाहरी सजावट से अधिक आत्मिक सुंदरता और स्वतंत्रता को महत्व देते हैं।
भाव स्पष्टीकरण :
बेटी कहती है कि माँ उसे सुंदर दिखने के लिए गहने पहनने और रंगीन कपड़े पहनने को कहती है ताकि लोग उसकी सुंदरता की प्रशंसा करें। लेकिन बेटी के अनुसार, दूसरों को अच्छा लगने के लिए खुद को सजाना एक बंधन जैसा लगता है।
गहने उसे तकलीफ देते हैं और महँगे कपड़े पहनकर वह स्वतंत्र रूप से खेल भी नहीं सकती। इसलिए वह बाहरी सौंदर्य की अपेक्षा स्वाभाविक सरलता, स्वतंत्रता और आत्म-संतोष को अधिक महत्व देती है।
विशेषताएँ :
- सरल, संवादात्मक और हृदयस्पर्शी भाषा
- माँ और बेटी के मधुर संबंध की सुंदर प्रस्तुति
‘गहने’ – सारांश (Hindi Summary)
‘गहने’ कविता कन्नड़ के प्रसिद्ध कवि कुवेंपू द्वारा रचित है तथा इसका हिंदी रूपांतरण डॉ. एम. विमला ने किया है। इस कविता में एक माँ और बेटी के बीच का भावपूर्ण संवाद प्रस्तुत किया गया है।
कविता में बेटी अपनी माँ से पूछती है कि उसे सोने के गहने क्यों पहनने चाहिए? बेटी कहती है कि सोने के गहने उसे तकलीफ़ देते हैं और वह उन्हें पहनना नहीं चाहती। वह यह भी पूछती है कि उसे रंग-बिरंगे कपड़े क्यों पहनने पड़ते हैं, क्योंकि उन कपड़ों में वह मिट्टी में खेल नहीं सकती, कपड़े गंदे हो जाते हैं।
माँ कहती है कि गहने और रंगीन कपड़े उसे सुंदर और आकर्षक बनाते हैं, जिससे देखने वालों को आनंद मिलता है।
लेकिन बेटी तर्क करती है कि किसके लिए सुंदर लगना ज़रूरी है? वह कहती है कि लोगों के देखने से उसे कोई खुशी नहीं मिलती, बल्कि गहने उसके लिए बंधन बन जाते हैं और उसे असहज महसूस होता है।
अंत में बेटी अपनी माँ से कहती है कि उसका बचपन और माँ का मातृत्व ही उसके लिए सबसे मूल्यवान गहने हैं। बेटी कहती है कि माँ उसके लिए गहना है और बेटी माँ के लिए गहना है। इसलिए दुनिया के अन्य गहनों का कोई महत्व नहीं।
इस प्रकार यह कविता माँ-बेटी के स्नेह-संबंध, स्वतंत्रता की भावना, और सादगी की महत्ता को सुंदर रूप में प्रस्तुत करती है।
अतिरिक्त प्रश्न तथा उत्तर (Additional Questions & Answers)
Question 1.
बेटी गहनों की जगह किसे अधिक मूल्यवान मानती है?
Answer:
बेटी अपने बचपन और माँ के मातृत्व को सबसे मूल्यवान मानती है और इन्हीं को अपना सच्चा गहना समझती है।
Question 2.
बेटी के अनुसार गहने पहनने से क्या नुकसान होता है?
Answer:
गहने पहनने से तकलीफ़ होती है, स्वतंत्रता कम हो जाती है, और मिट्टी में खेलने में बाधा आती है।
Question 3.
कविता में माँ की भावना क्या है?
Answer:
माँ चाहती है कि उसकी बेटी सुंदर दिखे, इसलिए वह उसे गहने और रंग-बिरंगे कपड़े पहनाने का आग्रह करती है ताकि समाज में उसकी प्रशंसा हो।
Question 4.
बेटी समाज की सोच के बारे में क्या कहती है?
Answer:
बेटी कहती है कि लोगों की खुशी के लिए सजना-धजना एक बंधन जैसा लगता है, इसलिए वह दूसरों को खुश करने के लिए अपने बचपन की स्वतंत्रता नहीं खोना चाहती।
Question 5.
कविता में कवि का मुख्य संदेश क्या है?
Answer:
कवि का संदेश है कि प्राकृतिक सौंदर्य ही वास्तविक सुंदरता है। गहने और बनावट से अधिक माँ-बेटी का प्रेम, बचपन की स्वतंत्रता और सरलता जीवन के सच्चे गहने हैं।
Question 6.
कविता में माँ और बेटी का संबंध कैसा है?
Answer:
माँ और बेटी का संबंध प्यार, विश्वास, भावनात्मक गहराई और समझ पर आधारित है। दोनों एक-दूसरे को गहना मानते हैं।
Question 7.
इस कविता में कवि ने किन मूल्यों को महत्व दिया है?
Answer:
सादगी, नैसर्गिक सौंदर्य, प्रेम, आत्म-सम्मान और स्वतंत्रता।