2nd PUC Hindi Question and Answer Adhikar
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Karnataka 2nd PUC Hindi Textbook Answers—Reflections Chapter 13
Adhikar Questions and Answers, Notes, and Summary
2nd PUC Hindi Chapter 13
Adhikar
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I एक शब्द या वाक्यांश या वाक्य में उत्तर लिखिए :
Question 1.
मुस्काते फूल को क्या आना चाहिए ?
Answer:
मुरझाना।
Question 2.
मेघ में किस चीज़ की चाह होनी चाहिए?
Answer:
घुल जाने की।
Question 3.
आँखों की सुंदरता किससे बढ़ती है ?
Answer:
आँसू-मोती से।
Question 4.
प्राणों की सार्थकता किसमें है ?
Answer:
पीड़ा सहने में (संघर्ष में)।
Question 5.
कवयित्री को किसकी चाह नहीं है ?
Answer:
अमरों के लोक की।
Question 6.
कवयित्री किस अधिकार की बात कर रही हैं?
Answer:
मिटने (नाश होने) के अधिकार की।
Question 7.
परमात्मा की करुणा से कवयित्री को क्या मिला ?
Answer:
मिटने का अधिकार।
II निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
Question 1.
फूल एवं तारों के विषय में कवयित्री महादेवी वर्मा क्या कहती हैं?
Answer:
कवयित्री ने फूल और तारों के माध्यम से जीवन की अस्थिरता और परिवर्तनशीलता को स्पष्ट किया है। वे कहती हैं कि फूल तभी सुंदर लगते हैं जब उनमें मुरझाने की क्षमता हो, क्योंकि बिना मुरझाए मुस्कुराना निरर्थक है। इसी तरह तारे तब ही प्रकाश का महत्व समझते हैं जब वे बुझना जानते हों। उनका भाव है कि जैसे फूल और तारे क्षय एवं परिवर्तन को स्वीकार करते हैं, वैसे ही मनुष्य को भी जीवन में सुख-दुःख को समान रूप से ग्रहण करना चाहिए। जो दुख सहने की क्षमता नहीं रखता, वह वास्तविक सुख का अनुभव नहीं कर सकता।
Question 2.
बादल एवं वसन्त ऋतु से हमें क्या प्रेरणा मिलती है?
Answer:
बादल हमें प्रेरणा देते हैं कि हमें स्वार्थी नहीं होना चाहिए, बल्कि दूसरों के दुख-दर्द को बांटते हुए उनके जीवन में शीतलता और शांति पहुँचानी चाहिए। वसंत ऋतु हमें नवीनता और निरंतर परिवर्तन का संदेश देती है — जैसे वसंत बार-बार लौटकर प्रकृति को नया रूप देता है, उसी प्रकार मनुष्य को भी जीवन में नए अनुभवों और नए प्रयासों को अपनाते रहना चाहिए।
Question 3.
जीवन की सार्थकता किसमें है?
Answer:
कवयित्री के अनुसार जीवन की सार्थकता सुख-दुःख दोनों को स्वीकार करने में है। जैसे बादल पिघलकर वर्षा बनते हैं और धरती को आनंदित करते हैं, उसी प्रकार मनुष्य की वास्तविकता संघर्ष और कठिनाइयों का सामना करने में है। पलायन जीवन को निर्थक बनाता है, जबकि संघर्ष उसे श्रेष्ठता प्रदान करता है।
Question 4.
कवयित्री अमरों के लोक को क्यों ठुकरा देती हैं?
Answer:
कवयित्री अमरों के लोक को इसलिए अस्वीकार करती हैं क्योंकि वहाँ न दुख है, न वेदना, न संघर्ष। उनके अनुसार जिस लोक में पीड़ा, अवसाद और मिटने-बुझने का अनुभव न हो, वह जीवनहीन है। दर्द और संघर्ष मनुष्य को परिपक्व और संवेदनशील बनाते हैं। इसलिए वे अमरों का लोक ठुकराकर अपने ‘मिटने के अधिकार’ को सुरक्षित रखना चाहती हैं।
Question 5.
‘ अधिकार’ कविता में प्रयुक्त प्राकृतिक तत्वों के बारे में लिखिए।
Answer:
कविता में प्रकृति के अनेक तत्व प्रयुक्त हुए हैं — जैसे फूल, तारे, मेघ (बादल), वसंत ऋतु, एवं आँसू-मोती। कवयित्री ने इन तत्वों को प्रतीक के रूप में प्रयोग करके बताया है कि प्रकृति में परिवर्तन शाश्वत है। जैसे फूल मुरझाते हैं, बादल बरसकर विलीन हो जाते हैं, तारे बुझ जाते हैं और वसंत के बाद अन्य ऋतुएँ आती हैं — उसी प्रकार मानव जीवन में भी सुख-दुःख, संघर्ष-वेदना स्वाभाविक हैं। इसलिए मनुष्य को साहस और धैर्य से उनका सामना करना चाहिए।
III ससंदर्भ भाव स्पष्ट कीजिए:
ऐसा तेरा लोक, वेदना,
नहीं, नहीं जिसमें अवसाद,
जलना जाना नहीं, नहीं-
जिसने जाना मिटने का स्वाद !
Answer:
प्रसंग :
प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक ‘साहित्य गौरव’ में संकलित ‘अधिकार’ नामक कविता से लिया गया है। इस कविता की रचनाकार प्रसिद्ध छायावादी कवयित्री महादेवी वर्मा हैं।
संदर्भ :
इन पंक्तियों में कवयित्री अपने ईष्ट देव या प्रियतम से कहती हैं कि ऐसा लोक, जहाँ न विरह-वेदना हो और न किसी प्रकार का दुःख या अवसाद, वह उन्हें स्वीकार नहीं। वे अपने वेदना से भरे जीवन में ही सच्चा संतोष और आनंद अनुभव करती हैं।
स्पष्टीकरण :
महादेवी वर्मा कहती हैं कि जिस संसार में दुःख, पीड़ा, संघर्ष, त्याग और बलिदान का अनुभव न हो, वह संसार निरर्थक है। जीवन की वास्तविकता कठिनाइयों का सामना करने में है, न कि उनसे भागने में। जिस व्यक्ति ने जलना नहीं सीखा, जिसने दुख का स्वाद नहीं चखा, वह खुशी और आनंद का महत्व भी नहीं समझ सकता। जो व्यक्ति दुःख और संघर्ष को सहते हुए आगे बढ़ता है, वही सच्चा जीवन जीता है और वही सच्ची मुस्कान का अर्थ जानता है। इसलिए कवयित्री ऐसे अमर लोक को ठुकराकर अपने ‘मिटने के अधिकार’ को अधिक मूल्यवान मानती हैं।
अतिरिक्त प्रश्न और उत्तर (Additional Questions & Answers)
Question 1.
छायावाद क्या है? संक्षेप में बताइए।
Answer:
छायावाद हिंदी साहित्य का एक महत्वपूर्ण काव्य-आंदोलन है, जो 1918 से 1936 तक विकसित हुआ। इसमें कवियों ने व्यक्तिवाद, रहस्यवाद, प्रकृति-प्रेम, स्वच्छंद भावना और कल्पना की उड़ान को केंद्र में रखा। भावनात्मक अभिव्यक्ति व सौंदर्यबोध इसकी मुख्य विशेषताएँ हैं।
Question 2.
छायावादी कवियों की काव्य-बोध की मुख्य विशेषता क्या है?
Answer:
छायावादी कवियों का काव्य-बोध आत्मानुभूति, प्रकृति-चित्रण, सौंदर्य-चेतना, मानवीय संवेदनाएँ और आध्यात्मिक विचारधारा पर आधारित है। वे बाह्य जगत की तुलना में अंतरात्मा और अनुभूति को महत्व देते हैं।
Question 3.
छायावाद काल को हिंदी काव्य का ‘स्वर्णयुग’ क्यों कहा जाता है?
Answer:
छायावाद काल में काव्य की भाषा अत्यंत सौंदर्यपूर्ण, कोमल, भावपूर्ण और संगीतात्मक हो गई थी। इस अवधि में निराला, प्रसाद, पंत और महादेवी वर्मा जैसे महान कवियों का उदय हुआ। इन कवियों ने हिंदी कविता को नई दिशा और ऊँचाई दी, इसलिए इसे ‘स्वर्णयुग’ कहा जाता है।
Question 4.
छायावादी काव्य में प्रकृति का महत्व समझाइए।
Answer:
छायावादी कवियों के लिए प्रकृति केवल दृश्य-चित्र नहीं बल्कि मानव हृदय की भावनाओं का प्रतीक है। प्रकृति में वे सखा, सहचारी, प्रेमी और मार्गदर्शक की अनुभूति करते हैं। प्रकृति-चित्रण में सौंदर्य, संगीत और भावनात्मक अनुभूति का अद्भुत सामंजस्य मिलता है।
Question 5.
महादेवी वर्मा को ‘आधुनिक मीरा’ क्यों कहा जाता है?
Answer:
महादेवी वर्मा की कविताओं में वियोग, भक्ति, प्रेम और वेदना की भावनाओं का अत्यंत संवेदनशील चित्रण मिलता है। उनका काव्य असाधारण आध्यात्मिक तन्मयता और भक्तिसंवेदना से भरा है, इसलिए उन्हें ‘आधुनिक मीरा’ कहा जाता है।
Question 6.
निराला के काव्य की एक प्रमुख विशेषता लिखिए।
Answer:
निराला के काव्य की विशेषता विद्रोह चेतना, मानवतावाद और जीवन संघर्ष है। उन्होंने समाज की रूढ़ियों व अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाई और नई चेतना को जन्म दिया।
Question 7.
छायावादी कवियों की भाषा शैली की विशेषताएँ लिखिए।
Answer:
✔ भाव-प्रधान और संगीतात्मक
✔ संस्कृतनिष्ठ, कोमल तथा मधुर शब्दावली
✔ अलंकारों का सजग प्रयोग
✔ प्रतीकात्मक और कल्पनात्मक शैली
पाँच बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
प्रश्न | विकल्प | उत्तर |
1. छायावाद का काल माना जाता है– | (A) 1900-1920 (B) 1918-1936 (C) 1936-1950 | B |
2. ‘आधुनिक मीरा’ किसे कहा जाता है? | (A) प्रसाद (B) पंत (C) महादेवी वर्मा | C |
3. छायावादी कविता का केंद्रीय विषय है– | (A) वीरता (B) प्रकृति-प्रेम (C) राजनीति | B |
4. छायावाद के चार स्तंभ कवि कौन हैं? | (A) तुलसी, कबीर, सूर, मीरा (B) प्रसाद, पंत, निराला, महादेवी | B |
5. छायावाद की भाषा शैली है– | (A) लोकभाषा प्रधान (B) संस्कृतनिष्ठ और भावपूर्ण | B |
‘अधिकार’ सारांश Summary
कविता ‘अधिकार’, महादेवी वर्मा की काव्य–कृति ‘नीहार’ से ली गई है। इस कविता में कवयित्री जीवन में दुःख, वेदना, संघर्ष और मिटने की सार्थकता को प्रस्तुत करती हैं। वह कहती हैं कि जो फूल मुस्कुराना जानते हैं, उन्हें मुरझाना भी आना चाहिए, और जो तारे चमकते हैं, उन्हें बुझना भी आता हो—तभी उनका अस्तित्व अर्थपूर्ण है। अर्थात् जीवन में सुख और दुख दोनों का समान महत्व है।
कवयित्री बादल और वसंत ऋतु के माध्यम से प्रेरणा देती हैं कि मनुष्य को दूसरों के दुःख में शामिल होना चाहिए और जीवन में निरंतर नये अनुभव स्वीकार करने चाहिए। जो जीवन कठिनाइयों से भागता है वह व्यर्थ है, क्योंकि जीवन की वास्तविकता संघर्ष में है, पलायन में नहीं।
महादेवी वर्मा पूछती हैं कि ऐसे लोक का क्या मूल्य जहाँ न पीड़ा है, न अवसाद, न टूटना है और न मिटना। जो जलना और मिटना नहीं जानता, वह जीने के आनंद को कैसे समझेगा? इसी कारण वे अमरों के उस लोक को अस्वीकार करती हैं जहाँ मृत्यु और वेदना नहीं है। वे ईश्वर से कहती हैं कि मुझे अमरत्व नहीं चाहिए—मेरा ‘मिटने का अधिकार’ मत छीनो, क्योंकि इसी से जीवन सार्थक बनता है।
इस प्रकार, कविता यह संदेश देती है कि दुःख और संघर्ष जीवन को पूर्णता प्रदान करते हैं, और उन्हीं में मनुष्य की संवेदनशीलता और वास्तविकता छिपी होती है।