2nd PUC Hindi Chapter 20 Question Bank

2nd PUC Hindi Question and Answer Pratishodh

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Karnataka 2nd PUC Hindi Textbook Answers—Reflections Chapter 20

Pratishodh Questions and Answers, Notes, and Summary

2nd PUC Hindi Chapter 20

Pratishodh

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I. एक शब्द / वाक्य में उत्तर

Question 1.
संस्कृत के महापंडित कौन हैं ?
Answer:
श्रीधर पंडित

Question 2.
संस्कृत के महाकवि कौन हैं?
Answer:
भारवि

Question 3.
भारवि की माँ का नाम क्या है ?
Answer:
सुशीला

Question 4.
सुशीला किसके लिए बेचैन है?
Answer:
अपने पुत्र भारवि के लिए

Question 5.
कवि किस पर शासन करता है ?
Answer:
पंडितों के हृदय पर

Question 6.
शास्त्रार्थ के नियमों में किसके हृदय को नहीं बाँधा जा सकता ?
Answer:
पंडितों के हृदय को

Question 7.
पुत्र को कौन निर्वासित कर सकता है ?
Answer:
पिता

Question 8.
पुत्र को कब निर्वासित किया जा सकता है ?
Answer:
अपराध या अनुशासन भंग करने पर

Question 9.
शास्त्रार्थों में पंडितों को किसने पराजित किया ?
Answer:
भारवि ने

Question 10.
भारवि में किस कारण अहंकार बढ़ता जा रहा था ?
Answer:
निरंतर विजय के कारण

Question 11.
पिता क्या नहीं सहन कर सकता ?
Answer:
अपमान

Question 12.
पिता ने भारवि की किन शब्दों में ताड़ना की ?
Answer:
कठोर और कटु शब्दों में

Question 13.
पंडित किस प्रकार भारवि का परिहास करने लगे ?
Answer:
उपहास और व्यंग्य करके

Question 14.
ग्लानि से भरे हुए भारवि को जाने से क्यों नहीं रोका गया ?
Answer:
अनुशासन की मर्यादा के कारण

Question 15.
अनुशासन की मर्यादा पर क्या किया जा सकता है?
Answer:
कठोर निर्णय लिया जा सकता है

Question 16.
श्रीधर पंडित का पुत्र क्या नहीं हो सकता ?
Answer:
अधम (दुष्ट)

Question 17.
श्रीधर पंडित के घर की सेविका का नाम लिखिए ।
Answer:
आभा

Question 18.
सुशीला किसको खोज कर लाने के लिए आभा से कहती है?
Answer:
भारवि को

Question 19.
प्रेम के बिना किसका मूल्य नहीं है ?
Answer:
ज्ञान का

Question 20.
श्रीधर पंडित भारवि को खोजने के लिए किसका सहारा लेना चाहते थे ?
Answer:
देवी भारती का

Question 21.
शास्त्रार्थ के लिए जाते समय भारवि ने किस रंग के कपड़े पहने थे ?
Answer:
सफेद

Question 22.
भारवि से मिलने आयी स्त्री का नाम लिखिए ।
Answer:
भारती

Question 23.
वसंत ऋतु में किसके स्वर से सभी परिचित हैं ?
Answer:
कोयल

Question 24.
ब्रह्म ज्ञान किसकी वीणा पर नृत्य करने के समान था ?
Answer:
भारवि की वीणा पर

Question 25.
भारती ने भारवि को कहाँ देखा था ?
Answer:
मालिनी नदी के तट पर

Question 26.
भारती ने जब भारवि को देखा तो उनकी स्थिति कैसी थी ?
Answer:
ध्यानमग्न अवस्था में

Question 27.
बीज से दूर रहने पर भी फूल क्या नहीं होता ?
Answer:
सुगंधित

Question 28.
भारवि के पिता को किसके पांडित्य को देखकर प्रसन्नता होती थी ?
Answer:
भारवि के पांडित्य को

Question 29.
अहंकार किसमें बाधक है ?
Answer:
उन्नति में

Question 30.
पिता के क्रोध में किसके प्रति मंगल कामना छिपी है ?
Answer:
पुत्र के प्रति

Question 31.
तलवार का प्रमाण किसका प्रमाण है ?
Answer:
प्रतिशोध का

Question 32.
जीवन से क्या उत्पन्न होती है ?
Answer:
प्रकाश

Question 33.
ब्रह्म का निवास कहाँ होता है ?
Answer:
हृदय में

Question 34.
भारवि के अनुसार क्या जघन्य पाप है ?
Answer:
पितृहत्या

Question 35.
भारवि को अपमान किसके समान खटक रहा था ?
Answer:
विष के समान

Question 36.
भारवि ने प्रतिशोध की आग में क्या करना चाहा ?
Answer:
पिता की हत्या

Question 37.
पितृ-हत्या का दण्ड क्या नहीं है ?
Answer:
क्षमा

Question 38.
भारवि के अनुसार जीवन का सबसे बड़ा अपराध क्या है ?
Answer:
पितृहत्या

Question 39.
‘प्रतिशोध’ एकांकी के एकांकीकार का नाम लिखिए ।
Answer:
नागनाथ नाईक

Question 40.
भारवि किस महाकाव्य की रचना कर महाकवि भारवि बने ?
Answer:
किरातार्जुनीयम्

II. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए :

Question 1.
भारवि से संबंधित माता-पिता के बीच होने वाले प्रारंभिक संवाद का सार लिखिए।

Answer:
सुशीला अपने पुत्र भारवि के लिए अत्यंत चिंतित है क्योंकि वह दो दिनों से घर नहीं लौटा है। वह उसके लौटने की प्रतीक्षा में भोजन भी तैयार रखती है। श्रीधर सुशीला को सांत्वना देते हुए कहते हैं कि पुत्र बड़ा होने पर स्वभावतः घर से दूर रहता है। परंतु सुशीला का मातृहृदय बेटे की चिंता में व्याकुल है। पिता भी अपने पुत्र के अहंकार बढ़ जाने से दुखी हैं। दोनों के बीच के संवाद से माता-पिता का प्रेम, चिंता और अनुशासन की भावना स्पष्ट होती है।

Question 2.
शास्त्रार्थ में पंडितों को हराते देख पिता ने भारवि के बारे में क्या सोचा?

Answer:
शास्त्रार्थ में निरंतर पंडितों को पराजित करते देख श्रीधर को गर्व तो हुआ, पर साथ ही उन्हें लगा कि भारवि में अहंकार बढ़ता जा रहा है। उन्हें चिंता थी कि यही अहंकार उसके पतन का कारण बन सकता है। इसलिए वे चाहते थे कि भारवि विनम्रता और संतुलन का पाठ सीखे।

Question 3.
सुशीला के अनुरोध पर श्रीधर ने भारवि को कहाँ-कहाँ और कैसे तलाश करने का वचन दिया?

Answer:
सुशीला के आग्रह पर श्रीधर ने वचन दिया कि वे देवालयों, आश्रमों, गुरुकुलों और नदी किनारे तक जाकर अपने पुत्र को खोजेंगे और देवी भारती की सहायता से उसे वापस लाएँगे।

Question 4.
भारती और सुशीला के वार्तालाप को अपने शब्दों में लिखिए।

Answer:
भारती सुशीला के घर आती है और बताती है कि उसने भारवि को मालिनी नदी के तट पर ध्यान मग्न अवस्था में देखा है। वह कहती है कि भारवि अत्यंत व्याकुल और थका हुआ प्रतीत हो रहा था। यह सुनकर सुशीला और तनावग्रस्त हो जाती है और भारति से प्रार्थना करती है कि वह उसके पुत्र को घर वापस लाने में सहायता करे।

Question 5.
भारवि अपने पिता से क्यों बदला लेना चाहता था?

Answer:
पिता द्वारा सबके सामने की गई कठोर आलोचना और कटु शब्दों से भारवि बहुत आहत हुआ। उसे यह अपमान असहनीय लगा और उसके मन में प्रतिशोध की आग भड़क उठी। इस क्रोध में उसने पिता की हत्या करने का भयावह निर्णय भी ले लिया।

Question 6.
‘अहंकार उन्नति में बाधक है।’ एकांकी के आधार पर श्रीधर के इस कथन को स्पष्ट कीजिए।

Answer:
इस एकांकी में भारवि की प्रतिभा और ज्ञान के कारण उसे निरंतर विजय मिल रही थी जिससे उसमें अहंकार बढ़ गया। उसकी विनम्रता नष्ट होने लगी और वह अपने पिता के प्रति भी कटु और उद्दंड हो गया। अंततः यह अहंकार उसे पितृहत्या जैसे पाप की ओर ले गया। इस प्रकार अहंकार मनुष्य के पतन का कारण बनता है और उन्नति में सबसे बड़ी बाधा है।

Question 7.
ग्लानि और जीवन के संबंध में श्रीधर के क्या विचार हैं?

Answer:
श्रीधर के अनुसार ग्लानि मनुष्य को आत्मचेतना प्रदान करती है और जीवन में सुधार का मार्ग खोलती है। मनुष्य को अपनी गलतियों का एहसास ग्लानि के माध्यम से होता है और वही पश्चाताप उसे नई दिशा देती है।

Question 8.
प्रायश्चित को लेकर पिता और पुत्र के बीच हुए संवाद को लिखिए।

Answer:
भारवि तलवार लेकर पिता से क्षमा माँगते हुए कहता है कि वह अपने अपराध के लिए दंड चाहता है। पिता क्रोधित होते हुए भी कहते हैं कि उनके क्रोध में भी पुत्र के प्रति कल्याण की भावना छिपी है। अंत में पिता उसे दंडस्वरूप छह महीने तक अपने श्वसुर के घर सेवा करने और जूठे भोजन पर जीवन बिताने का आदेश देते हैं। भारवि इसे स्वीकार करता है।

Question 9.
भारवि ने अपने पिता से किस प्रकार का दण्ड चाहा और उसे क्या दण्ड मिला ?

Answer:
भारवि कठोर दंड की याचना करता है, परंतु पिता उसे आदेश देते हैं कि वह छह महीने तक श्वसुर के घर सेवा करेगा और जूठे भोजन से जीवन-यापन करेगा।

चरित्र-चित्रण

Question 10.
(1)
महापंडित श्रीधर

श्रीधर एक आदर्श, विद्वान एवं अनुशासनप्रिय पिता हैं। वे न्यायप्रिय भी हैं और पुत्र की उन्नति चाहते हैं। कठोर होते हुए भी उनके मन में पुत्र के प्रति गहरा प्रेम है।

(2) सुशीला

सुशीला स्नेहमयी, त्यागमयी और मातृवात्सल्य से भरपूर माता हैं। वह पुत्र की चिंता में सदैव व्याकुल रहती हैं और उसके सुख-दुख में सहभागी हैं।

(3) महाकवि भारवि

भारवि अत्यंत विद्वान तथा प्रतिभाशाली हैं। शास्त्रार्थ में विजय ने उनका अहंकार बढ़ा दिया था, परंतु पश्चाताप के बाद उनमें परिवर्तन आ गया। वे अंततः विनम्र और महान साबित हुए।

Question 11.
टिप्पणी लिखिए

(1) आभा

आभा श्रीधर के घर की सेविका है, जो सुशीला की भावनाओं को समझती है और उसके आदेश पर भारवि को खोजने का प्रयत्न करती है। वह निष्ठावान और सहानुभूतिशील है।

(2) भारती

भारती एक विदुषी महिला है। वह भारवि को समझने और उसे सही मार्ग पर लाने में सहायक बनती है। भारवि के संकट की जानकारी वह माता-पिता तक पहुँचाती है।

  1. पाठेतर सक्रियता

प्रतिशोध एकांकी का मंचन

इस एकांकी में भावनाएँ, संवाद, मंच-सज्जा और अभिनय के अनेक अवसर हैं। इसे महाविद्यालय में प्रस्तुत करने से छात्रों में नाट्य-अभिव्यक्ति, भाषा-प्रयोग और नैतिक शिक्षा का विकास होता है।

सारांश (Summary)

इस नाट्य-अंश में कवि भारवि, उनकी माता सुशीला और पिता श्रीधर के बीच गहरी भावनात्मक घटनाएँ दिखाई देती हैं। सुशीला अपने पुत्र भारवि की अनुपस्थिति से अत्यंत दुखी और चिंतित है। वह दो दिनों से अपने पुत्र के लौटने की प्रतीक्षा कर रही है और भोजन भी तैयार रखती है। पिता श्रीधर भी प्रतीक्षा कर रहे हैं, परन्तु वे अपने पुत्र के बढ़ते अहंकार को रोकने के लिए समय-समय पर उसकी आलोचना किया करते हैं, ताकि वह विनम्र बना रहे और सच्ची उन्नति प्राप्त करे।

इसी बीच देवी भारती आती हैं और बताती हैं कि उन्होंने भारवि को मालिनी नदी के तट पर ध्यानमग्न अवस्था में देखा था, जिससे माता की चिंता और भी बढ़ जाती है। जब भारवि अन्ततः घर लौटता है तो वह ग्लानि से व्याकुल है और हाथ में तलवार लेकर आता है। वह स्वीकार करता है कि पिता की आलोचना और लोगों के सामने की निंदा ने उसके मन में घोर क्रोध और प्रतिशोध की भावना पैदा कर दी थी। उसने निश्चय किया था कि वह अपने पिता की हत्या करेगा, पर अब उसे अपनी गलती का गहरा पश्चाताप है। वह अपने पिता से दण्ड देने की प्रार्थना करता है।

श्रीधर उसे क्षमा कर देते हैं और दण्डस्वरूप आदेश देते हैं कि वह छः महीने तक अपने श्वसुर के घर सेवा करेगा और जूठे भोजन से जीवन-यापन करेगा। भारवि दण्ड स्वीकार कर तुरंत घर से चला जाता है। उसकी माता उसे रोकने का असफल प्रयास करती है और अत्यंत करुणा से रोती है। अन्त में, भारवि का स्वर सुनाई देता है—“प्रतिशोध…” जो उसके आत्म-प्रतिशोध की भावना को दर्शाता है।

यह दृश्य दर्शाता है—

  • माता का पुत्र के लिए अमर प्रेम
  • पिता का कठोर, परन्तु हितकारी अनुशासन
  • पुत्र का अहंकार, पश्चाताप और आत्म-सुधार
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